Wednesday, June 12, 2024

वीज़ा अमरीका का

         

                     वीज़ा अमरीका का 

जैसे शादी के लिए पहले सगाई होती है उसी तरह किसी देश में जाने के लिए पहले वीज़ा लेना पड़ता है ।  शादी,  बिना सगाई के भी हो जाती है लेकिन देश से बाहर जाने के लिए वीज़ा लेना बहुत ज़रूरी होता है और अमेरिका का वीज़ा मिलना , किसी मनचाही खूबसूरत हीरोइन का मिल जाना । 

शशी और मैं, खुरपिया के एक छोटे से गाँव में पढ़ते थे | तब हमारे लिए हमारा अमेरिका किताबों तक ही सीमित था । हम भूड़ा , खलुआ , भट्टा  देवरिया और  किछा , यही तक हमारी दुनिया सीमित थी । शशि और मैं  स्काउट और गाइड में टोली नायक बना करते थे ।  इसके बहाने कभी शान्तिपुरी , रुद्रपुर आदि घूमने का मौका मिलता था । एक दोस्त राम चन्दर  जो स्काउट के बदौलत   कभी नैनीताल जा पाया था , उसने बताया की नैनीताल बहुत सुन्दर है और जब झील के किनारे चलो तो बादल हमारे साथ चलते है , ऐसा  लगता है कि हम बादल में चल रहे है ।  तब हम सोचते थे कि बादल में कैसे चलते होंगे ?

शशि पढ़ाई करने के बाद जॉब में अमेरिका चला गया । हमारे खुरपिया से कोई लड़का पहली बार विदेश गया था वह भी अमेरिका । हर तरफ गाँव में शशि कि चर्चा होने लगी । कभी शशि अमेरिका से फोन करता था तो हमे गर्व महसूस होता था कि हमारा भी दोस्त है अमेरिका में ।  उस समय व्हाट्सप्प नहीं था तो हम शशि को कॉलिंग नहीं कर पाते थे उस समय इंटरनेशनल कॉल बहुत महंगी थी । लेकिन जब भी वह इंडिया आता हम मिलकर खूब बाते करते और बचपन की  बात करके खूब हँसते थे । 

शशि अक्सर कहता आओ एक बार अमेरिका का चक्कर लगा लो । सात समंदर पार चक्कर लगाना , हमसे नैनीताल का चक्कर नहीं लगता था  फिर पईसा ?  और  उसके बाद वीजा ?

एक बार शशि आया तो वो और मैं भीमताल गए वहाँ हमने एक विडिओ बनाई " अमेरिका से आया मेरा दोस्त " और उस दिन बचपन की  बाते याद करते हुए हम बहुत हँसे । इस बार शशि सिरियस होकर बोला  "यार इस बार अपना अमेरिका का वीजा लगवा लो, खूब फन करेंगे  " । 

बचपन में कभी सोचा नहीं था कि अमेरिका जाने के बारे में सोचेंगे । एक बार जब में शादी के लायक हुआ तो जन्म कुंडली बनवाई , मेरी जन्म कुंडली बनी नहीं थी , अम्मा से जब भी जन्म कि डेट पूछी तो कहती फागुन का महीना था  और हमारी भैंस ने बच्चा दिया था उस समय पैदा हुआ था । अब उस भैंस से कैसे पूछता कि तूने बच्चा कब दिया था ।  खैर , पंडित जी ने जैसे तैसे समीकरण बैठाके कुंडली बनवाई तो सबसे पहले उस समय मैंने पूछा कि मेरा विदेश जाने का योग है कि नहीं ? पंडित जी क्या कहा मुझे याद नहीं शायद मना  ही किया होगा ।

विदेश जाने के चक्कर में ,मैने जॉब लगने के कुछ समय बाद ही अपना पासपोर्ट बनवा लिया था । पासपोर्ट को बने दस साल हो गए कोई मौका नहीं बना । पासपोर्ट  Expire हो गया । मैंने  फिर रीन्यू करवाया और पाँच साल होने के बाद मेरा एक और दोस्त बिल्लू जो कि   कई सालों से यूके  और यूरोप मे जॉब कर रहा था , उससे मैंने  कहा  "यार पासपोर्ट दूसरी बार भी एक्सपायर  होने वाला है एक बार विदेश का ठप्पा  लगवा दे " ।  बिल्लू ने एक की जगह सात  ठप्पे लगवा  दिए । स्वीडन , फ़्रांस , जर्मनी , बेल्जियम , नार्वे , डेनमार्क और स्विट्ज़रलैंड ( जो कि मेरा सपना था ) । जो बात पंडितजी कुंडली में देखकर नहीं बता पाए वो सपना साला एक दोस्त ने पूरा कर दिया ।  

विदेश में एक बार जाने से कॉन्फिडेंस बहुत आ गया । शायद उस समय अपने  एलआईसी ग्रुप में, मैं पहला बंदा था जो विदेश गया था  । इस बार शशि के कहने पर वीजा के लिए तैयार हो गया और वीजा अप्लाइ करने की तरीख थी 13 .11.2022 । ये तारीख ऐसे याद हो गई जैसे हनीमून की  तारीख हो । 

वीजा के लिए  ऑनलाइन फॉर्म  DS-160 भरना होता है । दोनों ने एक समय तय  किया क्योंकि अमेरिका और इंडिया में 12 घंटे का अंतर है यहाँ शाम होती है तो वहाँ सुबह । मैने अपने यहाँ सुबह का समय तय किया । शशि ने फॉर्म भरवाने में पूरी मदद की । जब वीजा की फीस जमा की , जो कि उस समय 13000/- लगभग प्रति व्यक्ति थी,  इंटरव्यू कि डेट आई मई 2025  यानि दो साल बाद। शशि से मैंने कहा ये कैसे ? उसने बताया कि US  के लिए लंबी लाइन  होती है तुम इसे साइट पर जाकर Reschedule करते रहना , ये डेट कम हो जायेगी । इसमे दो डेट होती है है एक OFC  appointment और दूसरी Consular appointment । पहले में Biometric और पेपर चेक होते है दूसरे में  US  Embassy में पर्सनल इंटरव्यू होता है । 

अब मैं हर 15 दिन में ऑनलाइन  इंटरव्यू की  डेट चेक करने लगा  और धीरे धीरे सरकते हुए  अप्रैल 2024 की डेट मिली । 

मई 2023 में मेरा ट्रांसफर  रुड़की से हल्द्वानी हो गया । इसी बीच ऑनलाइन वीजा कि साइट चेंज हो गई और नई साइट में मेरा डाटा दिखा नहीं रहा था , मुझे अप्रैल 2024 के इंटरव्यू की  सही डेट याद नहीं थी , शशि ने भी बहुत ट्राइ किया पर सही डेट का पता नहीं चल पा रहा था । अब एक नई समस्या हो गई , डेढ साल बाद नंबर आया और सही डेट का पता नहीं । खैर, शशि ने सुझाया कि टोल फ्री नंबर पर बात करो वो हेल्प करेंगे । मैंने साइट से टोल फ्री नंबर लेकर फोन घुमाना शुरू किया और वास्तव में इस टोल फ्री नंबर ने मुझे घुमा दिया । पहले एक दबाओ , फिर दो दबाओ , दबाते ही रहो और बाद में बिजी टोन आ  जाती थी । 

बिल्लू ने एक दिन कहा " बेटा  US  का वीजा है,  इतनी आसानी से नहीं मिलेगा , लगाते रहो " फिर एक दिन फोन लग गया और डेट थी  03.04.2024 और 15.04.2024 ।  मैं और तुलसी  एक दिन पहले दिल्ली पहुँच गए और वेब साइट से देखकर इंटरव्यू के प्रश्न उत्तर की जोरशोर  से तैयारी करने लगे ।  उसमे एक प्रश्न दोस्त का एड्रैस भी था , उसको रटने में बहुत टाइम लगा । अगले दिन 03 अप्रैल को सुबह 9.30 का टाइम था , हम घबराए हुए थे और दिल्ली के ट्राफिक का रिस्क भी नहीं लेना चाहते थे तो हमारे साले साहब कर्नल भगवान सिंह बिष्ट हमे खुद छोड़ने  चाणक्यपुरी ( जहां पर सारी embassy है )  आए । 

वहाँ फोन आदि कुछ भी allow नहीं है , हमने फोन और अन्य समान कर्नल साहब कि गाड़ी में छोड़ दिया और वो हमे छोड़ कर चले गए ।  लाइन बहुत लंबी थी , ऐसा लग रहा था कि सब लोग इंडिया छोड़ कर अमेरिका जा रहे है । बाकी Embassy में सब खाली दिख रहा था । 

लाइन  में  लगने के बाद जब हमारा नंबर आया तो उन्होंने बताया कि आपको शिवाजी स्टेडियम जाना है बाओमेट्रिक के लिए । हमारे हाथ पाव  फूल गए क्योंकि जो टाइम हमें दिया था वह निकाल चुका था, कर्नल साहब भी जा चुके थे हमारा मोबाईल और सामान लेकर । हमारी घबराहट देखकर एक ऑफिसर ने कहा कि आप शाम तक वहाँ जा सकते है । ये सुनकर ऐसा  लगा जैसे किसी प्रेमिका ने प्रेमी का प्रेमपत्र स्वीकार कर लिया हो । 

अब कर्नल साले साहब को कैसे बुलाए , एक सिक्युरिटी ऑफिसर से फोन मांगा  तो उसने फोन देने से मना  कर दिया  , हमने अपनी समस्या बताई तो उसने कहा कि फोन नंबर बताए वह फोन खुद लगाएगा । आजकल फोन नंबर किसको याद रहते है,  अब ऐसा भी नहीं कर सकते कि फोन करके फोन नंबर पूछ लेते ।  तभी तुलसी ने कहा " अपने फोन में कॉल करवाओ शायद कर्नल साहब उठा ले । ऐसा ही किया और ये तीर चल गया ।  

कर्नल साहब ने हमे शिवाजी स्टेडियम छोड़ा , वहाँ जब लाइन में लगकर हमारा नंबर आया तो उन्होंने बताया कि आपको अप्लाइ किए हुए छः महीने से ज्यादा हो गए है इसलिए आपको ये आनलाइन अपडेट करना पड़ेगा । हमने  कहा कि  छः महीने से ऊपर हमारी गलती थोड़ी है नंबर ही डेढ़ साल बाद आया है । उसने कहा आपको यह करवाना ही होगा  अन्यथा सॉरी । 

वहाँ यह नॉर्मल रूटीन था , वहाँ दलाल घूमते रहते है , एक हमारे पास आया बोला एक के अपडेट करने के 1000/- लगेंगे , 2 के 2000/- । मैने कहा लूट मची है सिर्फ अपडेट करने के 2000/- । मैने तुलसी से कहा कि मैं  मोबाईल में खुद अपडेट कर लूँगा लेकिन प्रिन्ट आउट कैसे निकलेगा । तभी एक दूसरा दलाल आया उसने कहाँ  मैं  500/- में करवा दूंगा । तुलसी ने कहा कि कहाँ  चक्कर  में पड़े हो , अमेरिका जा रहे हो और 500/ , 1000/- देख रहे हो । तुलसी का ये हथोड़ा  काम कर गया , अमेरिका के नाम पर लुटने को तैयार हो गया। जब लड़का मन पसंद मिल  जाए और  दहेज थोड़ा ज्यादा देना पड़े तब तकलीफ नहीं होती । 

प्रिन्ट आउट लेकर हमारा बायोमेट्रिक आराम से हो गया , एक आध प्रश्न उन्होंने भी पूछे । क्यों जाना  चाहते हो ? वहाँ कौन है ?  वगैरह  वगैरह । 

अब एक हरडल तो पार कर लिया था ,  दूसरा  हरडल 15 अप्रैल को था । मैं  सोच रहा रहा था , ये सब तो एक ही जगह और एक ही दिन हो सकता था , दो दिन बुलाने का कान्सेप्ट मेरी समझ में नहीं आया । 

लोगों ने डरा  रखा था कि अमेरिका का वीजा इतनी आसानी से नहीं मिलता है । लेकिन मेरा प्लस पॉइंट ये था कि मैं  एलआईसी में जॉब में थे दूसरा यूरोप घूम कर आया था बिल्लू की  बदौलत । 

 15 अप्रैल को US Embassy हम समय पर पहुँच गए । एक लम्बी लाइन के बाद हमारा नंबर आया । वहाँ इंटरव्यू के लगभग 10 काउन्टर बने होंगे । एक काउन्टर पर एक खूबसूरत अंग्रेज लड़की बैठी थी । मैंने तुलसी से कहा कि हमारा इंटरव्यू ये ले तो अच्छा है , भले ही वीजा न लगे लेकिन एक खूबसूरत लड़की से इंटरव्यू तो हो जाएगा । तुलसी ने कुहनी मारते हुए और मुझे घूरते हुए  कहा तुम नहीं सुधरोगे । 

किस्मत बहुत साथ दे रही थी , उसी खूबसूरत लड़की के सामने हमारा इंटरव्यू का नंबर आया । तुलसी ने मुझे चंचल भरी नज़रों से देखा । जैसे कह रही हो , बड़े लकी हो तुम । 

मैने  शशि का एड्रैस रट  रखा  कहा था , 107 BEACON FALLS CT, CARY , NORTH CAROLINA  27519,  क्योंकि ये बताया गया कि सबसे पहले ये पूछेंगे कि US में आप कहाँ जाएंगे ? 

 लेकिन उस खूबसूरत लड़की ने  पूछा " Mr Chand you are going to NORTH CAROLINA  ? "

I said " yes "  

She asked " have u visited any other foreign country? " 

I said " yes,  I have visited seven  European countries "

फिर उसने तुलसी से पूछा "  Why didn't you go to Europe with your husband ?"

तुलसी ने कहा  " I was busy with my children"

फिर उसने शशि के बारे में , उसके जॉब के बारे में और मेरे जॉब के बारे प्रश्न पूछे । 

अंत में  उसने कहा " your visa has been accepted "  और उसने हमारे पासपोर्ट ले लिए । 

तुलसी खुशी से उछल पड़ी और उससे बोली " Thank you Thank you Thank you "

Embassy से बाहर निकलते हुए गर्व कि अनुभूति हो रही थी । 

तुलसी ने कहा " मुझे अमेरिका जाने कि उतनी खुशी नहीं है जितनी इस वीजा के इंटरव्यू को clear करने की  है " मुझे ऐसा  लग रहा था जैसे किसी आईएएस का Exam.  क्रैक कर लिया हो   ।