“जब आये थे नौकरी करने, हँसते रहे हर पल फुर्सत-छल्ल,
मेहनत से जीवन सजाया, मन था उनका सच्चा, निर्मल,
सदा रहे नरवाल… सदा रहे नरवाल…
दफ्तर में सबके चेहरे खिलते, जब आते थे ये मुस्कान सँभाल,
हर थकान को हँसी में बदला, न किया किसी से कोई मलाल,
सदा रहे नरवाल… सदा रहे नरवाल…
कर्मठता जिनकी पहचान रही, काम में रखते थे कमाल,
हर टारगेट को जी-जान से पाया, मुश्किलों के आगे रहे बेमिसाल,
सदा रहे नरवाल… सदा रहे नरवाल…
घर की जिम्मेदारी भी निभायी, बच्चों को दिया संस्कार का लाल,
सीधापन था इनके जीवन में, दिल था बेहद निर्मल, विशाल,
सदा रहे नरवाल… सदा रहे नरवाल…
अब रूठ गया है वो हँसमुख चेहरा, जिसकी बातें लगती थीं गुलाल,
आँखें नम हैं पर गर्व भी उतना— ऐसा जीवन मिलता है विरल-बेमिसाल,
सदा रहे नरवाल… सदा रहे नरवाल…
ईश्वर से बस यही प्रार्थना— मिले उन्हें शांति का उजला भाल,
उनकी यादें बनें प्रेरणा, उनकी सीख रहे सबसे खास मिसाल,
सदा रहे नरवाल… सदा रहे नरवाल…

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